नीपाह वायरस (Nipah Virus) पर लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट – जनवरी 2026

Nipah Virus

भारत के पश्चिम बंगाल कोलकाता के पास में जनवरी 2026 में नीपाह वायरस के 5 मामले कन्फर्म हो चुके हैं, जिसमें डॉक्टर, नर्स और हेल्थकेयर स्टाफ शामिल हैं। यह बैट-बोर्न वायरस है, जो इंसान से इंसान में फैलता है। मौत का खतरा 50-75% तक है, कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक इलाज फिलहाल नहीं है। हेल्थ अथॉरिटीज़ ने क्वारंटाइन और सर्विलांस शुरू कर दिया है। अभी तक ज्यादा फैला नहीं है, लेकिन फिर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।

नीपाह वायरस क्या है?

नीपाह वायरस (NiV) एक Zoonotic Virus है, यानी जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह Henipavirus जीनस का हिस्सा है और Paramyxoviridae फैमिली से आता है। पहली बार 1998-99 में मलेशिया में पहचाना गया था, जहां इससे सैकड़ों लोग प्रभावित हुए और कई मौतें हुईं।

भारत में यह पहली बार 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आया था। उसके बाद केरल (2018, 2021, 2023) और बांग्लादेश में बार-बार आउटब्रेक हुए हैं। मुख्य कैरियर फ्रूट बैट्स (Pteropus प्रजाति) होते हैं, जो वायरस को बिना बीमार हुए कैरी करते हैं।

जनवरी 2026 की शुरुआत में कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में दो नर्सों में नीपाह वायरस कन्फर्म हुआ है। दोनों में से एक की हालत गंभीर है और कोमा में है। और जांच में पता चला कि ये दोनों एक ऐसे मरीज की देखभाल कर रही थीं, जो पहले से एडमिट था और बाद में उसकी मौत हो गई (टेस्टिंग से पहले)।

अब तक कुल 5 मामले कन्फर्म हो चुके हैं:

  • 2 नर्सें
  • 1 डॉक्टर
  • 1 अन्य नर्स
  • 1 हेल्थकेयर स्टाफ

लगभग 100 लोगों को होम क्वारंटाइन में रखा गया है, जो इनके संपर्क में आए थे। हेल्थ ऑफिशियल्स ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग चल रही है।

यह आउटब्रेक हॉस्पिटल सेटिंग में फैला है, जो नीपाह के इंसान-से-इंसान ट्रांसमिशन होता है। अभी तक कोई बड़ा कम्युनिटी स्प्रेड रिपोर्ट नहीं हुआ, लेकिन इससे बरती जा रही है।

नीपाह वायरस कैसे फैलता है? (ट्रांसमिशन)

  • बैट से इंसान : फ्रूट बैट्स के मूत्र, लार या मल से दूषित फल/डेट पाम सैप पीने से।
  • इंसान से इंसान : निकट संपर्क में – सांस की बूंदों (respiratory droplets), बॉडी फ्लूइड्स, या हॉस्पिटल में बिना PPE के मरीज की देखभाल से।
  • फूड : गिरे हुए या बैट द्वारा काटे फल खाने से।
  • इंक्यूबेशन पीरियड: 5-14 दिन (कभी-कभी 45 दिन तक)।

WHO इसे Biosafety लेवल 4 पैथोजेन मानता है – यानी बहुत खतरनाक।

क्या-क्या लक्षण हैं? (Symptoms

शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसा लगता है, लेकिन थोड़े देर बाद अचानक गंभीर हो जाता है:

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश
  • उल्टी
  • खांसी और सांस लेने में तकलीफ

बाद में:

  • Encephalitis (दिमाग में सूजन)
  • Coma
  • Death (फैटलिटी रेट 40-75%)

अगर शुरुआती स्टेज में इसका सही से देखभाल और इलाज दिया जाए तो बचने के चांस ज्यादा होंगे , लेकिन यह कोई Specific Antiviral नहीं है। Supportive Treatment (ICU, वेंटिलेटर) दिया जाता है।

रोकथाम के उपाय (Prevention)

  • फ्रूट बैट्स से दूर रहें : बैट्स वाले इलाकों में फल न खाएं जो गिरे हों या कटे हों।
  • डेट पाम सैप न पिएं (खासकर रॉ, बिना उबाले)।
  • हाइजीन : हाथों को बार-बार धोएं, और फलों को भी अच्छे से धोएं और छीलें।
  • हॉस्पिटल में : PPE (Personal Protective Equipment) मास्क, ग्लव्स, गाउन यूज करें ।
  • अवेयरनेस : अगर बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से मिलें, खासकर अगर बैट-एरिया से हैं।

क्या वास्तव में Vaccine या इलाज है?

अभी तक तो कोई भी Approved Vaccines या Specific दवा नहीं है। लेकिन अच्छी बात यह है कि 2026 में बंगलादेश में PHV02 वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल्स शुरू होंगे – यह पहला बड़ा कदम है। लेकिन अभी भी रिसर्च जारी है, और WHO इसे हाई प्रायोरिटी थ्रेट मानता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *